मुहम्मद इक़बाल मसऊदी (उर्दू: محمد اقبال) (जीवन: 9 नवम्बर 1877 – 21 अप्रैल 1938). उपनाम - अलामा इक़बाल।
अविभाजित भारत के प्रसिद्ध कवि, नेता और दार्शनिक थे। उर्दू और फ़ारसी में इनकी शायरी को आधुनिक काल की सर्वश्रेष्ठ शायरी में गिना जाता है। 1904 - "सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा " ग़ज़ल के लेखक।
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Published02 Oct 2021
Duration01:39
Episodes
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मेरा वतन वही है...!!!
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02 Oct 2021
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मता-ए-बे-बहा है दर्द-ओ-सोज़-ए-आरज़ू-मंदी !!!
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02 Oct 2021
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वो हर्फ़-ए-राज़ के मुझ को सिखा गया है जुनूँ
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न तू ज़मीं के लिए है न आसमाँ के लिए
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02 Oct 2021
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वहीं मेरी कम-नसीबी वही तेरी बे-नियाज़ी...
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02 Oct 2021
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दिल सोज़ से ख़ाली है निगह पाक नहीं है...
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न तख़्त ओ ताज में ने लश्कर ओ सिपाह में है !!!
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02 Oct 2021
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02 Oct 2021
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हादसा वो जो अभी पर्दा-ए-अफ़लाक में है....
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ख़ुदा से हुस्न ने इक रोज़ ये सवाल किया_हकी़क़ते-हुस्न ...!!!
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29 Sep 2021
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सितारों के आगे जहाँ और भी हैं....
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मजनूँ ने शहर छोड़ा है सहरा भी छोड़ दे !!!
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तू अभी रहगुज़र में है क़ैद-ए-मकाम से गुज़र...
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जुगनू
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ख़िरदमन्दों से क्या पूछूँ कि मेरी इब्तिदा क्या है
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25 Sep 2021
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जब इश्क़ सिखाता है आदाब-ए-ख़ुद-आगाही
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उट्ठो मेरी दुनिया के ग़रीबों को जगा दो
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जिन्हें मैं ढूँढता था आस्मानों में ज़मीनों में
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कभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुन्तज़र
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क्या कहूँ अपने चमन से मैं जुदा क्योंकर हुआ
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अजब वाइज़ की दीन-दारी है या रब
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25 Sep 2021
20-
फिर चराग़े-लाला से रौशन हुए कोहो-दमन
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ख़ुदा के बन्दे तो हैं हज़ारों बनो में फिरते हैं मारे-मारे
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तराना-ए-हिन्दी (सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोसिताँ हमारा )